Salam Ferne Ki Dua नमाज़ का आख़िरी और निर्णायक हिस्सा है। यह केवल एक औपचारिक वाक्य नहीं, बल्कि इबादत को पूरा करने की शरई घोषणा है। जब बंदा सलाम फेरता है, तो वह फ़रिश्तों और अपने आसपास मौजूद लोगों को अमन और रहमत की दुआ देता है।
फ़ुक़हा का इस पर इत्तेफ़ाक़ है कि सलाम के बिना नमाज़ मुकम्मल नहीं होती। इसलिए इसके शब्द, तरीका और समय तीनों का सही होना बेहद ज़रूरी है।
Salam Ferne Ki Dua नमाज़ के अंत का वह सबसे महत्वपूर्ण अमल है, जिसके बिना नमाज़ पूरी नहीं होती। नमाज़ खत्म करते समय दाईं और बाईं तरफ़ सिर घुमाकर “As-salāmu ʿalaykum wa raḥmatullāh” कहना सुन्नत और प्रमाणित तरीका है। सलाम से पहले कुछ दुआएँ पढ़ना और सलाम के बाद विशेष ज़िक्र करना नबी ﷺ से सहीह हदीसों में साबित है। इस लेख में सही अरबी दुआ, उच्चारण, अर्थ, salam ferne ka tarika और आम गलतियाँ पूरी स्पष्टता के साथ बताया गया है।
नमाज़ में सलाम की अहमियत (केवल रस्म नहीं)
सलाम नमाज़ को दुनिया से जोड़ता है। इबादत की हालत से निकलकर इंसान अमन और रहमत के पैग़ाम के साथ समाज में वापस आता है। यही वजह है कि नबी ﷺ ने सलाम को छोटा, साफ़ और अर्थपूर्ण रखा।
Salam Ferne Ki Dua
अरबी
السَّلَامُ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَةُ اللَّهِ
उच्चारण (Transliteration)
As-salāmu ʿalaykum wa raḥmatullāh
अर्थ (Salam Ferne Ki Dua in hindi)
“तुम पर शांति हो और अल्लाह की रहमत हो।”
कितनी बार?
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दो बार
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एक बार दाईं तरफ़
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एक बार बाईं तरफ़
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यही नबी ﷺ का लगातार अमल रहा है।
महत्वपूर्ण बात: सलाम के समय इससे ज़्यादा शब्द जोड़ना सहीह सुन्नत से साबित नहीं।
Salam Ferne Ka Tarika (सही तरीका – स्टेप बाय स्टेप)
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तशह्हुद, दुरूद और दुआ पूरी करने के बाद बैठी हुई हालत में रहें
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दाईं तरफ़ सिर घुमाएँ
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इतना कि पीछे बैठे लोग गाल देख सकें
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कहें: As-salāmu ʿalaykum wa raḥmatullāh
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फिर बाईं तरफ़ सिर घुमाएँ
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वही शब्द दोहराएँ
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आवाज़ इतनी हो कि खुद सुन सकें
आम गलतियाँ
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जल्दी-जल्दी बिना सिर घुमाए सलाम फेरना
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सलाम के शब्दों में अपनी तरफ़ से कुछ जोड़ना
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केवल एक तरफ़ सलाम करना (बिना कारण)
Salam Ferne Se Pehle Ki Dua (सलाम से पहले पढ़ी जाने वाली दुआ)
तशह्हुद और दुरूद के बाद, सलाम से पहले दुआ करना सुन्नत है। यह दुआ क़बूलियत का विशेष समय है।
1️⃣ चार बड़ी आज़माइशों से पनाह की दुआ
अरबी
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابِ جَهَنَّمَ، وَمِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ، وَمِنْ فِتْنَةِ الْمَحْيَا وَالْمَمَاتِ، وَمِنْ شَرِّ فِتْنَةِ الْمَسِيحِ الدَّجَّالِ
उच्चारण
Allāhumma innī aʿūdhu bika min ʿadhābi Jahannam…
अर्थ
“ऐ अल्लाह! मैं जहन्नम के अज़ाब, क़ब्र के अज़ाब, ज़िंदगी और मौत की परीक्षाओं और दज्जाल के फ़ितने से तेरी पनाह चाहता हूँ।”
2️⃣ मग़फ़िरत की जामे दुआ
अरबी
اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي مَا قَدَّمْتُ وَمَا أَخَّرْتُ، وَمَا أَسْرَرْتُ وَمَا أَعْلَنْتُ
अर्थ
“ऐ अल्लाह! मेरे अगले-पिछले, छुपे और खुले सभी गुनाह माफ़ कर दे।”
राय: सलाम से पहले लंबी दुआओं की बजाय एक-दो दुआ पूरे ध्यान से पढ़ना बेहतर है।
Salam Ferne Ke Baad Ki Dua (सलाम के बाद के ज़िक्र)
सलाम के बाद कुछ विशेष ज़िक्र नबी ﷺ से सहीह हदीसों में साबित हैं।
1️⃣ तीन बार इस्तिग़फ़ार
अरबी
أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ
अर्थ:
“मैं अल्लाह से माफ़ी मांगता हूँ।”
2️⃣ अमन की दुआ
अरबी
اللَّهُمَّ أَنْتَ السَّلَامُ، وَمِنْكَ السَّلَامُ، تَبَارَكْتَ يَا ذَا الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ
अर्थ:
“ऐ अल्लाह! तू ही सलामती है और तुझी से सलामती मिलती है।”
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तस्बीह, तहमीद, तकबीर
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33 बार Subḥānallāh
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33 बार Al-ḥamdu lillāh
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34 बार Allāhu akbar
सलाम से जुड़ी ज़रूरी चेतावनियाँ
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सलाम के शब्दों में कुछ बढ़ाना सहीह नहीं
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ज़ोर से आवाज़ लगाना दूसरों की नमाज़ में खलल डालता है
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सलाम के बाद सामूहिक ऊँची आवाज़ में दुआ नियमित सुन्नत नहीं
निष्कर्ष
Salam Ferne Ki Dua नमाज़ का अंत नहीं, बल्कि अमन के साथ इबादत से निकलने की शुरुआत है। जब सलाम सही शब्दों, सही दिशा और सही भावना से किया जाता है, तो नमाज़ का असर दिल और किरदार दोनों में उतरता है।
छोटा सा यह अमल, अगर सुन्नत के मुताबिक़ किया जाए, तो पूरी नमाज़ को वज़न और क़बूलियत देता है।
? FAQs – लोगों के आम सवाल
क्या salam ferne ki dua फ़र्ज़ है?
सलाम फ़र्ज़ नहीं, लेकिन नमाज़ से निकलने के लिए अनिवार्य अमल है।
क्या एक ही सलाम काफी है?
दो सलाम सुन्नत हैं, एक विशेष स्थिति में जायज़ हो सकता है।
क्या salam ferne ki dua in hindi पढ़ सकते हैं?
नमाज़ में नहीं। अरबी ही पढ़ी जाएगी। हिंदी अर्थ समझने के लिए है।
क्या salam ferne ke baad की दुआ अपनी भाषा में कर सकते हैं?
हाँ, ज़िक्र के बाद निजी दुआ की जा सकती है।
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