यह लेख आपको बुरी नज़र से बचाव के लिए Nazar Utarne Ki Dua In Quran की पूरी जानकारी देता है। यहाँ आपको कुरान और हदीस से प्रमाणित दुआएं, उनका सही उच्चारण, हिंदी अर्थ, और व्यावहारिक तरीके मिलेंगे। बच्चों, बालों और परिवार के लिए विशेष दुआएं भी शामिल हैं।
बुरी नज़र एक ऐसी वास्तविकता है जिसे इस्लाम स्पष्ट रूप से मान्यता देता है। पैगंबर मुहम्मद ﷺ ने फरमाया कि “नज़र सच्ची होती है” (सहीह बुखारी)। जब किसी व्यक्ति की खुशहाली, सेहत या सुंदरता को देखकर कोई हसद (ईर्ष्या) या अत्यधिक प्रशंसा करता है, तो वह नज़र लग सकती है। आपके बच्चे की मुस्कान अचानक गायब हो जाती है, आपका कामकाज बिना किसी कारण रुक जाता है, या शरीर में अस्पष्ट बेचैनी महसूस होती है – ये सब नज़र के संकेत हो सकते हैं।
Nazar utarne ki dua केवल शब्द नहीं, बल्कि अल्लाह की शक्ति से जुड़ने का माध्यम है। यह लेख आपको वे प्रमाणित दुआएं सिखाएगा जो सदियों से मुसलमानों ने अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए पढ़ी हैं। हर दुआ कुरान या सहीह हदीस से ली गई है, कोई भी अप्रमाणित सामग्री यहाँ नहीं है।
नज़र क्या है और इसके लक्षण
नज़र अरबी में “अल-ऐन” कहलाती है। यह एक आध्यात्मिक प्रभाव है जो किसी की निगाह से आता है। कुरान में अल्लाह ने सूरह अल-फलक में इससे बचने की दुआ सिखाई है।
सामान्य लक्षण:
अचानक बीमारी या कमजोरी जिसका कोई चिकित्सीय कारण न हो। व्यापार या नौकरी में अचानक नुकसान। बच्चों में बेचैनी, रोना या सोने में परेशानी। सिरदर्द जो सामान्य दवाओं से ठीक न हो। घर में लगातार झगड़े और तनाव।
Nazar Utarne Ki Dua In Quran – मुख्य दुआएं
1. सूरह अल-फलक (Complete Surah)
यह सूरह nazar utarne ki dua का सबसे शक्तिशाली स्रोत है।
अरबी:
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ
مِن شَرِّ مَا خَلَقَ
وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ
وَمِن شَرِّ النَّفَّاثَاتِ فِي الْعُقَدِ
وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ
Transliteration: Qul a’udhu bi rabbil-falaq Min sharri ma khalaq Wa min sharri ghasiqin idha waqab Wa min sharrin-naffathati fil-‘uqad Wa min sharri hasidin idha hasad
हिंदी अर्थ: कहो, मैं प्रातःकाल के रब की शरण चाहता हूँ। हर उस चीज़ की बुराई से जो उसने बनाई। और अंधेरी रात की बुराई से जब वह छा जाए। और गांठों में फूंक मारने वालों की बुराई से। और हसद करने वाले की बुराई से जब वह हसद करे।
कब पढ़ें: सुबह-शाम तीन बार, सोने से पहले तीन बार।
2. सूरह अन-नास (Complete Surah)
अरबी:
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ
مَلِكِ النَّاسِ
إِلَٰهِ النَّاسِ
مِن شَرِّ الْوَسْوَاسِ الْخَنَّاسِ
الَّذِي يُوَسْوِسُ فِي صُدُورِ النَّاسِ
مِنَ الْجِنَّةِ وَالنَّاسِ
Transliteration: Qul a’udhu bi rabbin-nas Malikin-nas Ilahin-nas Min sharril-waswasil-khannas Alladhi yuwaswisu fi sudurin-nas Minal-jinnati wan-nas
हिंदी अर्थ: कहो, मैं लोगों के रब की शरण चाहता हूँ। लोगों के बादशाह की। लोगों के माबूद की। उस वसवसे डालने वाले की बुराई से जो छिप जाता है। जो लोगों के दिलों में वसवसे डालता है। जिन्नों और इंसानों में से।
3. आयतुल कुर्सी (Ayatul Kursi)
यह nazar utarne ki dua in hindi समझने के लिए सबसे महत्वपूर्ण आयत है।
अरबी:
اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ ۚ لَا تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلَا نَوْمٌ ۚ لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۗ مَن ذَا الَّذِي يَشْفَعُ عِندَهُ إِلَّا بِإِذْنِهِ ۚ يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ ۖ وَلَا يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِّنْ عِلْمِهِ إِلَّا بِمَا شَاءَ ۚ وَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ ۖ وَلَا يَئُودُهُ حِفْظُهُمَا ۚ وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ
Transliteration: Allahu la ilaha illa huwal-hayyul-qayyum, la ta’khudhuhu sinatun wa la nawm, lahu ma fis-samawati wa ma fil-ard, man dhal-ladhi yashfa’u ‘indahu illa bi-idhnih, ya’lamu ma bayna aydihim wa ma khalfahum, wa la yuhituna bi-shay’im-min ‘ilmihi illa bima sha’a, wasi’a kursiyyuhus-samawati wal-ard, wa la ya’uduhu hifdhuhuma, wa huwal-‘aliyyul-‘adhim
हिंदी अर्थ: अल्लाह, उसके सिवा कोई माबूद नहीं, वह जीवित और सबका संभालने वाला है। उसे न ऊंघ आती है और न नींद। आसमानों और ज़मीन में जो कुछ है सब उसी का है। कौन है जो उसकी इजाज़त के बिना उसके पास सिफारिश करे? वह जानता है जो उनके सामने है और जो उनके पीछे है। और वे उसके इल्म में से कुछ नहीं पा सकते मगर जितना वह चाहे। उसकी कुर्सी आसमानों और ज़मीन पर छाई हुई है। और उसे उनकी देखभाल थकाती नहीं। और वह बुलंद और अज़ीम है।
विशेषता: पैगंबर ﷺ ने फरमाया कि यह कुरान की सबसे बड़ी आयत है। इसे सोते समय पढ़ने से पूरी रात अल्लाह की सुरक्षा रहती है।
Balo Ki Nazar Utarne Ki Dua In Quran
बालों का झड़ना या अचानक खराब होना भी नज़र का संकेत हो सकता है। Balo ki nazar utarne ki dua के लिए यह विशेष तरीका अपनाएं:
दुआ:
अरबी:
أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ
Transliteration: A’udhu bi kalimatillahit-tammati min sharri ma khalaq
हिंदी अर्थ: मैं अल्लाह के पूर्ण कलमों की शरण चाहता हूँ, हर उस चीज़ की बुराई से जो उसने बनाई।
तरीका:
वुज़ू करें। यह दुआ 7 बार पढ़ें। अपने हाथों पर दम करें (फूंकें)। हाथों को बालों पर फेरें। यह प्रक्रिया सुबह-शाम दोहराएं।
Baccho Ki Nazar Utarne Ki Dua In Quran
बच्चे नज़र के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। Baccho ki nazar utarne ki dua वही है जो पैगंबर ﷺ अपने नवासों हसन और हुसैन رضي الله عنهما के लिए पढ़ते थे।
अरबी:
أُعِيذُكُمَا بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّةِ مِنْ كُلِّ شَيْطَانٍ وَهَامَّةٍ وَمِنْ كُلِّ عَيْنٍ لَامَّةٍ
Transliteration: U’idhukuma bi kalimatillahit-tammati min kulli shaytanin wa hammatin wa min kulli ‘aynin lammah
हिंदी अर्थ: मैं तुम दोनों को अल्लाह के पूर्ण कलमों की शरण में देता हूँ, हर शैतान से, हर ज़हरीले जानवर से और हर बुरी नज़र से।
माता-पिता के लिए निर्देश:
रोज़ाना सोने से पहले अपने बच्चे के सिर पर हाथ रखकर यह दुआ पढ़ें। बच्चे बीमार हों तो दिन में 3-5 बार दोहराएं। “उकुमा” (तुम दोनों) को “उकुम” (तुम सब) कर सकते हैं अगर एक से ज़्यादा बच्चे हों।
Nazar Utarne Ki Dua In Quran Aur Tarika
Nazar utarne ki dua aur tarika को सही ढंग से अपनाना ज़रूरी है। यहाँ व्यावहारिक चरण दिए गए हैं:
पूर्ण तरीका (Step-by-Step)
तैयारी:
नीयत (इरादा) साफ रखें कि आप अल्लाह की मदद चाह रहे हैं। पाक-साफ हालत में हों (वुज़ू बेहतर है पर ज़रूरी नहीं)। शांत जगह चुनें।
प्रक्रिया:
बिस्मिल्लाह पढ़ें – बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम। सूरह अल-फलक – 3 बार। सूरह अन-नास – 3 बार। सूरह अल-इखलास – 3 बार। आयतुल कुर्सी – 1 बार। दोनों हाथों पर फूंकें। पूरे शरीर पर हाथ फेरें (सिर से पैर तक)।
अतिरिक्त उपाय:
अगर किसी विशेष व्यक्ति पर नज़र का संदेह हो, तो उससे वुज़ू करवाकर वह पानी प्रभावित व्यक्ति पर डालें (यह हदीस से प्रमाणित है)। रुक्यह (आध्यात्मिक उपचार) करने वाले विद्वान से मदद लें। नियमित नमाज़ और कुरान पढ़ने से सुरक्षा बनी रहती है।
Nazar Utarne Ki Dua In English
विदेश में रहने वाले या अंग्रेज़ी पढ़ने वाले मुसलमानों के लिए nazar utarne ki dua in english transliteration ऊपर हर दुआ के साथ दी गई है। याद रखें:
महत्वपूर्ण बातें:
अरबी सीखने की कोशिश करें, क्योंकि दुआओं का असली प्रभाव अरबी में ही है। शुरुआत में transliteration का इस्तेमाल करें। धीरे-धीरे अरबी पढ़ना सीखें। मायने समझना भी ज़रूरी है।
अतिरिक्त प्रामाणिक दुआएं
दुआ 1: पैगंबर ﷺ की दुआ
अरबी:
اللَّهُمَّ أَذْهِبِ الْبَاسَ رَبَّ النَّاسِ اشْفِ أَنْتَ الشَّافِي لاَ شِفَاءَ إِلاَّ شِفَاؤُكَ شِفَاءً لاَ يُغَادِرُ سَقَمًا
Transliteration: Allahumma adh-hibil-ba’sa rabban-nasi washfi antash-shafi la shifa’a illa shifa’uka shifaan la yughadiru saqama
हिंदी अर्थ: ऐ अल्लाह! तकलीफ को दूर कर दे, ऐ लोगों के रब! शिफा दे, तू ही शिफा देने वाला है। तेरी शिफा के सिवा कोई शिफा नहीं, ऐसी शिफा जो कोई बीमारी न छोड़े।
कब इस्तेमाल करें: बीमारी या दर्द के समय।
दुआ 2: सुबह-शाम की सुरक्षा
अरबी:
بِسْمِ اللَّهِ الَّذِي لاَ يَضُرُّ مَعَ اسْمِهِ شَيْءٌ فِي الأَرْضِ وَلاَ فِي السَّمَاءِ وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
Transliteration: Bismillahil-ladhi la yadurru ma’asmihi shay’un fil-ardi wa la fis-sama’i wa huwas-sami’ul-‘alim
हिंदी अर्थ: अल्लाह के नाम के साथ, जिसके नाम के साथ ज़मीन और आसमान में कोई चीज़ नुकसान नहीं पहुँचा सकती, और वह सुनने वाला जानने वाला है।
तादाद: सुबह 3 बार, शाम 3 बार। पैगंबर ﷺ ने फरमाया कि जो इसे सुबह 3 बार पढ़े, उसे शाम तक कोई अचानक मुसीबत नहीं आएगी।
नज़र से बचाव के व्यावहारिक उपाय
दुआओं के साथ ये सावधानियां भी अपनाएं:
रोज़मर्रा की आदतें:
अपनी खुशियाँ और नेमतें बिना ज़रूरत सोशल मीडिया पर शेयर न करें। “माशाल्लाह” और “तबारकल्लाह” कहने की आदत डालें। जब कोई आपकी तारीफ करे तो “अल्लाह बरकत दे” कहें। नमाज़ को कभी न छोड़ें – यह सबसे बड़ी सुरक्षा है।
बच्चों के लिए:
बच्चों को ज़रूरत से ज़्यादा सजा-संवारकर बाहर न निकालें। मेहमानों के सामने बच्चों की बहुत तारीफ न करें। बच्चों को सोते समय सूरह अल-फलक सुनने की आदत डालें।
घर के लिए:
घर में नियमित रूप से कुरान की तिलावत होनी चाहिए। सूरह बक़रह पढ़ने से शैतान घर से भागता है। घर को साफ-सुथरा रखें।
चेतावनियाँ और सावधानियाँ
गलत तरीके जिनसे बचें:
ताबीज़ या पत्थर बांधना जिनमें कुरान की आयतें नहीं हैं – यह शिर्क हो सकता है। नज़र उतारने के नाम पर जादू-टोना – यह हराम है। मज़ारों पर मन्नतें मानना – यह केवल अल्लाह से मांगनी चाहिए। नीम-हकीमों के पास जाना जो अज़ीब-ओ-गरीब रस्में करवाते हैं।
अहम नोट:
नज़र का इलाज इस्लामी तरीके से करें। अगर तबीयत ज़्यादा खराब हो तो डॉक्टर को ज़रूर दिखाएं। दुआ के साथ दवा भी इस्लाम में मना नहीं है। पैगंबर ﷺ ने फरमाया: “ऐ अल्लाह के बंदो! इलाज करो, क्योंकि अल्लाह ने कोई बीमारी ऐसी नहीं उतारी जिसकी शिफा न उतारी हो।”
विशेष परिस्थितियों के लिए
नई शादी के बाद
शादीशुदा जोड़ों पर नज़र लगने की संभावना ज़्यादा होती है। सूरह अल-फलक नियमित पढ़ें और एक-दूसरे के लिए दुआ करें।
नई नौकरी या व्यापार शुरू करते समय
काम शुरू करने से पहले दो रकात नफ्ल पढ़ें और उपरोक्त दुआएं पढ़कर दम करें।
गर्भावस्था के दौरान
गर्भवती महिलाओं को रोज़ाना बच्चों वाली दुआ पढ़नी चाहिए। पेट पर हाथ रखकर पढ़ें।
निष्कर्ष
Nazar utarne ki dua केवल शब्द नहीं, बल्कि अल्लाह की शक्ति से जुड़ने का सीधा रास्ता है। जब आप सच्चे दिल से ये दुआएं पढ़ते हैं, तो आप अपने आपको दुनिया की सबसे बड़ी ताकत की सुरक्षा में डाल देते हैं। याद रखें, हर दुआ का अपना मक़ाम है – सूरह अल-फलक हसद से बचाती है, आयतुल कुर्सी पूरी रात की सुरक्षा देती है, और पैगंबर ﷺ की सिखाई दुआएं बीमारियों का इलाज हैं।
इन दुआओं को अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बनाएं। सुबह उठते ही, सोने से पहले, घर से निकलते समय – हर वक़्त अल्लाह को याद रखें। आपके बच्चे, आपका परिवार, आपकी सेहत और आपका माल सब अल्लाह की अमानत हैं। इन दुआओं के ज़रिए आप उस अमानत की सही हिफाज़त कर रहे हैं।
अगर किसी को नज़र लग गई है तो घबराएं नहीं। धैर्य रखें, नियमित रूप से ये दुआएं पढ़ें, और अल्लाह पर भरोसा रखें। वह शाफी (शिफा देने वाला) है, वह हाफ़िज़ (सुरक्षा देने वाला) है। आपकी हर दुआ सुनी जाती है, चाहे फौरी असर न भी दिखे।
आज से ही इन दुआओं को अपनी और अपने प्रियजनों की ज़िंदगी में शामिल करें। अल्लाह आपको और आपके परिवार को हर बुराई से महफूज़ रखे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: क्या बिना वुज़ू के nazar utarne ki dua पढ़ सकते हैं?
जी हाँ, कुरान की आयतें बिना वुज़ू के भी ज़ुबानी पढ़ सकते हैं। लेकिन वुज़ू के साथ पढ़ना बेहतर है क्योंकि इससे दुआ की क़बूलियत की संभावना बढ़ती है। अगर आप कुरान छूकर पढ़ना चाहें तो वुज़ू ज़रूरी है।
Q2: कितनी बार दुआ पढ़नी चाहिए?
सूरह अल-फलक और अन-नास सुबह 3 बार, शाम 3 बार और सोने से पहले 3 बार पढ़ें। आयतुल कुर्सी सोते समय एक बार ज़रूर पढ़ें। अगर नज़र का शक़ हो तो दिन में 5-7 बार भी पढ़ सकते हैं।
Q3: क्या औरतें माहवारी के दौरान ये दुआएं पढ़ सकती हैं?
जी हाँ, बिल्कुल। माहवारी या नफास (प्रसव के बाद का रक्तस्राव) के दौरान भी ये दुआएं ज़ुबानी पढ़ सकती हैं। केवल कुरान को हाथ में पकड़ना और तिलावत की नीयत से पढ़ना मना है, लेकिन दुआ के तौर पर पढ़ना जायज़ है।
Q4: Baccho ki nazar utarne ki dua कौन सी सबसे असरदार है?
वही दुआ जो पैगंबर ﷺ ने हसन और हुसैन رضي الله عنهما के लिए पढ़ी: “उईज़ुकुमा बि कलिमातिल्लाहित्तम्मति…” (ऊपर बच्चों वाले section में पूरी दुआ दी गई है)। इसे रोज़ाना सोने से पहले पढ़ें।
Q5: क्या nazar utarne ki dua के लिए पानी पर दम करना सही है?
जी हाँ, यह सुन्नत से साबित है। आप पानी पर ऊपर बताई गई दुआएं पढ़कर फूंक सकते हैं, फिर वह पानी पी सकते हैं या नहाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। कुछ विद्वान ज़ैतून के तेल पर भी दम करने की इजाज़त देते हैं।
Q6: अगर किसी ख़ास शख़्स की नज़र लगी हो तो क्या करें?
अगर यक़ीन से पता हो कि किस व्यक्ति की नज़र लगी है, तो उस व्यक्ति से विनम्रता से कहें कि वह वुज़ू करे और उस पानी से प्रभावित व्यक्ति पर छींटे मारे। यह हदीस से साबित तरीक़ा है। लेकिन इसे ज़बरदस्ती या बुरे तरीक़े से न करें।
Q7: क्या नज़र सिर्फ मुसलमानों को लगती है?
नहीं, नज़र किसी को भी लग सकती है चाहे वह किसी भी धर्म का हो। यह एक आध्यात्मिक वास्तविकता है। मुसलमानों को फायदा यह है कि उनके पास इसका इलाज कुरान और हदीस में दिया गया है।
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