.

Inteqal Ki Dua | इंतकाल की दुआ – अरबी, हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी में पूरी दुआ

जब किसी मुसलमान को किसी के इंतेकाल (मृत्यु) की खबर मिलती है, तो वो फ़ौरन एक खास दुआ पढ़ता है जिसे Inteqal Ki Dua कहते हैं। यह दुआ क़ुरआन-ए-पाक की आयत है और इसे “इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलैही राजिऊन” कहते हैं।

यह दुआ सिर्फ मौत की खबर पर ही नहीं, बल्कि हर तरह की मुसीबत, तकलीफ़ और परेशानी के वक्त भी पढ़ी जाती है। इस्लाम में इसे “इस्तिरजा” (Istirja) कहा जाता है, यानी अल्लाह की तरफ लौटने का ऐलान।

Complete Inteqal Ki Dua | पूर्ण इंतेकाल की दुआ

Inteqal Ki Dua in Arabic (अरबी में)

إِنَّا لِلَّهِ وَإِنَّآ إِلَيْهِ رَٰجِعُونَ

Inteqal Ki Dua Transliteration (रोमन में उच्चारण)

Inna Lillahi Wa Inna Ilayhi Raji’un

Inteqal Ki Dua in Hindi (हिंदी अर्थ)

“बेशक हम अल्लाह के हैं, और बेशक हम उसी की तरफ लौटने वाले हैं।”

Inteqal Ki Dua in Urdu (اردو ترجمہ)

بے شک ہم اللہ کے لیے ہیں اور ہمیں اسی کی طرف لوٹنا ہے۔

Inteqal Ki Dua in English (अंग्रेज़ी अर्थ)

“Indeed, to Allah we belong, and indeed, to Him we shall return.”

क़ुरआनी हवाला

यह Inteqal Ki Dua क़ुरआन-ए-पाक की सूरह अल-बक़रह, आयत 155–157 से ली गई है। अल्लाह तआला फ़रमाता है:

“और हम ज़रूर तुम्हें कुछ डर, भूख, और माल व जान और फलों की कमी से आज़माएंगे और उन्हें खुशख़बरी दो जो सब्र करते हैं, जो जब भी कोई मुसीबत आती है तो कहते हैं: ‘इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलैही राजिऊन’ यही लोग हैं जिन पर उनके रब की रहमत और मेहरबानी है, और वही हिदायत पाने वाले हैं।”

(सूरह अल-बक़रह: 155–157)

इंतेकाल की दुआ की अहमियत और वजह

Inteqal Ki Dua यानी “इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलैही राजिऊन” सिर्फ कुछ अल्फ़ाज़ नहीं हैं — यह एक गहरा एहसास है कि यह दुनिया अस्थायी है, और हम सब एक दिन अल्लाह के पास लौटेंगे।

जब कोई अपना बिछड़ जाता है, तो दिल टूट जाता है। लेकिन यह दुआ मुसलमान को याद दिलाती है कि जो अल्लाह ने दिया था, वो अल्लाह ने वापस ले लिया — और इस पर सब्र करना ईमान की निशानी है।

यह दुआ इस्लामी अकीदे की बुनियाद पर टिकी है जिसे “तवक्कुल” कहते हैं — यानी अल्लाह पर पूरा भरोसा।

यह दुआ कब पढ़ें? (Inteqal Ki Dua Kab Parhein)

Inteqal Ki Dua निम्न मौकों पर पढ़ी जाती है:

  • किसी के इंतेकाल की खबर मिलने पर — यह सबसे आम और ज़रूरी मौका है
  • किसी भी मुसीबत, तकलीफ़ या नुकसान पर — चाहे माली हो, जिस्मानी हो या ज़ज्बाती
  • कोई चीज़ खो जाने पर या कोई परेशानी आने पर
  • किसी हादसे या बुरी खबर सुनने पर
  • छोटी-बड़ी किसी भी तकलीफ पर — यहां तक कि जूते का तस्मा टूट जाए तो भी

नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया कि हर मुसीबत पर यह दुआ पढ़ना चाहिए — बड़ी हो या छोटी।

इंतेकाल की पूरी दुआ: मुसीबत के वक्त की मुकम्मल दुआ

इंतेकाल की खबर मिलने पर सिर्फ “इन्ना लिल्लाही” पढ़ना काफी है, लेकिन नबी ﷺ ने एक और दुआ भी बताई है जो इसके साथ पढ़ी जाए:

अरबी:

إِنَّا لِلَّهِ وَإِنَّآ إِلَيْهِ رَٰجِعُونَ، اللَّهُمَّ عِنْدَكَ أَحْتَسِبُ مُصِيبَتِي، فَأْجُرْنِي فِيهَا، وَأَبْدِلْنِي مِنْهَا خَيْرًا

Transliteration:

Inna Lillahi wa Inna Ilayhi Raji’un. Allahumma ‘Indaka Ahtasibu Musibati, Fa’jurni Fiha, Wa Abdilni Minha Khayra.

हिंदी अर्थ:

“बेशक हम अल्लाह के हैं और उसी की तरफ लौटेंगे। ऐ अल्लाह! मैं तेरे पास अपनी इस मुसीबत का अज्र तलब करता हूँ, पस मुझे इसमें सवाब दे और इसके बदले मुझे इससे बेहतर दे।”

यह दुआ हदीस में उम्म सलमा (रज़ि.) की रिवायत से साबित है, जिसे जामी तिरमिज़ी (3511) में दर्ज किया गया है और इसे हसन कहा गया है।

इस दुआ के फ़वाइद  (Inteqal Ki Dua Ke Fayde)

1. क़ियामत के दिन अज्र (सवाब) मिलता है

नबी करीम ﷺ का इरशाद है कि जो मुसलमान किसी मुसीबत में यह दुआ पढ़ता है, अल्लाह तआला उसे इसका बदला देता है — और बदले में उससे बेहतर चीज़ अता फ़रमाता है। (जामी तिरमिज़ी: 3511)

2. हर बार पढ़ने पर नया सवाब मिलता है

हज़रत हुसैन इब्न अली (रज़ि.) से रिवायत है कि नबी ﷺ ने फ़रमाया:

“जो मुसलमान मुसीबत में पड़े और उसे याद करे, चाहे काफी वक़्त गुज़र जाए, फिर ‘इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलैही राजिऊन’ पढ़े — अल्लाह तआला हर बार उसके लिए नया सवाब लिखता है, जैसे पहले दिन लिखा था।” (मिशकात: 1759)

3. दिल को सुकून और राहत मिलती है

यह दुआ दिल को याद दिलाती है कि सब कुछ अल्लाह का है, और वो जो चाहे ले सकता है। इस सोच से दिल का दर्द कम होता है और सब्र आता है।

4. अल्लाह की रहमत और मगफ़िरत का वादा

सूरह बक़रह में अल्लाह ने वादा किया है कि जो लोग मुसीबत में “इन्ना लिल्लाही” पढ़ते हैं, उन पर अल्लाह की रहमत और हिदायत होती है।

5. ईमान मज़बूत होता है

यह दुआ बार-बार याद दिलाती है कि दुनिया की ज़िंदगी अस्थायी है — असली घर तो आखिरत है। इससे ईमान और तवक्कुल मज़बूत होता है।

इंतेकाल पर तअज़ियत की दुआ (Condolence Dua)

जब किसी मरहूम के घर वालों को तसल्ली देनी हो, तो यह दुआ पढ़ें:

अरबी:

اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَارْحَمْهُ وَعَافِهِ وَاعْفُ عَنْهُ

Transliteration:

Allahummaghfir Lahu Warhamhu Wa ‘Afihi Wa’fu ‘Anhu

हिंदी अर्थ:

“ऐ अल्लाह! उसे माफ कर, उस पर रहम फ़रमा, उसे आफियत दे और उसे मुआफ़ कर दे।”

निष्कर्ष (Conclusion)

Inteqal Ki Dua यानी “इन्ना लिल्लाही व इन्ना इलैही राजिऊन” हर मुसलमान के लिए एक ज़रूरी दुआ है। यह दुआ क़ुरआन-ए-पाक की आयत है और हर मुसीबत, दुख और तकलीफ़ के वक्त पढ़ी जाती है।

यह दुआ सिर्फ ज़ुबान से नहीं, बल्कि दिल की गहराई से पढ़ी जाए तो यह दिल को सुकून देती है, ईमान को मज़बूत करती है और अल्लाह की रहमत का ज़रिया बनती है।

अल्लाह तआला हम सभी को हर मुसीबत में सब्र करने की तौफ़ीक़ दे और इस दुआ को दिल से पढ़ने की हिम्मत अता फ़रमाए। आमीन।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. Inteqal Ki Dua in Hindi क्या है?

जवाब: इंतेकाल की दुआ का हिंदी अर्थ है: “बेशक हम अल्लाह के हैं और हमें उसी की तरफ लौटना है।” यह दुआ अरबी में इस तरह पढ़ी जाती है: إِنَّا لِلَّهِ وَإِنَّآ إِلَيْهِ رَٰجِعُونَ

Q. Inteqal Ki Dua in English क्या है?

जवाब: अंग्रेज़ी में इसका मतलब है: “Indeed, to Allah we belong, and indeed, to Him we shall return.” इसकी रोमन transliteration है: Inna Lillahi Wa Inna Ilayhi Raji’un

Q. Inteqal Ki Dua in Arabic कहाँ से है?

जवाब: यह दुआ सीधे क़ुरआन-ए-पाक की सूरह अल-बक़रह, आयत 156 से ली गई है। यह अल्लाह का कलाम है।

Q. Inteqal Ki Dua in Urdu क्या है?

जवाब: उर्दू में: بے شک ہم اللہ کے لیے ہیں اور ہمیں اسی کی طرف لوٹنا ہے۔

Q. क्या यह दुआ सिर्फ मौत पर पढ़ी जाती है?

जवाब: नहीं। यह दुआ हर तरह की मुसीबत, तकलीफ़, नुकसान या बुरी खबर पर पढ़ी जाती है। हदीस से साबित है कि छोटी से छोटी परेशानी पर भी यह पढ़ना जायज़ और सवाब का काम है।

Q. क्या गैर-मुस्लिम के इंतेकाल पर भी यह दुआ पढ़ सकते हैं?

जवाब: उलेमा की राय है कि इस्लाम में इस दुआ को सिर्फ मुसलमानों तक महदूद रखने की कोई दलील नहीं है। इसलिए किसी के भी इंतेकाल पर यह पढ़ी जा सकती है।

Q. इस दुआ का दूसरा नाम क्या है?

जवाब: इसे “इस्तिरजा” (Istirja) कहते हैं, जिसका मतलब है “अल्लाह की तरफ लौटने का ऐलान करना।”

🤲 Recite Also These Beautiful Duas For Blessings And Peace: