जब कोई इंसान बीमार पड़ता है, तो उसका दिल सबसे पहले अल्लाह की तरफ मुड़ता है। इस्लाम में बीमारी को एक आज़माइश माना गया है और इस आज़माइश में अल्लाह से दुआ माँगना सबसे बड़ा सहारा है। Bimari se shifa ki dua वह कलाम है जो नबी करीम ﷺ और क़ुरआन-ए-पाक से साबित है, और जिसे पढ़ने से अल्लाह की रहमत नाज़िल होती है।
चाहे खुद बीमार हों, या किसी अज़ीज़ की तकलीफ देख रहे हों यह दुआएँ हर मुसलमान को याद होनी चाहिए। ये दुआएँ सिर्फ अलफ़ाज़ नहीं हैं, बल्कि अल्लाह पर पूरा भरोसा रखने का ज़रिया हैं।
Complete Bimari Se Shifa Ki Dua in Arabic
दुआ नंबर 1 – नबी ﷺ की मशहूर शिफा की दुआ
Arabic:
اللَّهُمَّ رَبَّ النَّاسِ، أَذْهِبِ الْبَأْسَ، اشْفِ أَنْتَ الشَّافِي، لَا شِفَاءَ إِلَّا شِفَاؤُكَ، شِفَاءً لَا يُغَادِرُ سَقَمًا
Transliteration: Allahumma Rabban-Naas, Adh-hibil-Ba’sa, Ishfi Antash-Shaafi, Laa Shifaa’a Illaa Shifaa’uka, Shifaa’an Laa Yughaadiru Saqamaa
Hindi Meaning: “ऐ अल्लाह! लोगों के रब, तकलीफ दूर फरमा। शिफा दे तू ही शिफा देने वाला है। तेरी शिफा के अलावा कोई शिफा नहीं ऐसी शिफा जो कोई बीमारी बाकी न छोड़े।”
Reference: सहीह बुखारी, हदीस: 5742 | सहीह मुस्लिम, हदीस: 2191
दुआ नंबर 2 – बीमार की अपनी दुआ
Arabic:
أَسْأَلُ اللَّهَ الْعَظِيمَ، رَبَّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ، أَنْ يَشْفِيَكَ
Transliteration: As’alullahal-‘Azeema, Rabbal-‘Arshil-‘Azeemi, An Yashfiyak
Hindi Meaning: “मैं अल्लाह अज़ीम से, जो अर्श-ए-अज़ीम का रब है, सवाल करता हूँ कि वो तुझे शिफा दे।”
Reference: सुनन अबू दाऊद, हदीस: 3106 | इमाम तिर्मिज़ी
नबी ﷺ ने फरमाया: जो शख्स किसी बीमार के पास जाए और यह दुआ सात बार पढ़े, अल्लाह उसे उस बीमारी से शिफा देगा जब तक उसकी अजल न आई हो।
दुआ नंबर 3 – Bimari Se Shifa Ki Dua in Quran (सूरह अल-इसरा)
Arabic:
وَنُنَزِّلُ مِنَ الْقُرْآنِ مَا هُوَ شِفَاءٌ وَرَحْمَةٌ لِّلْمُؤْمِنِينَ
Transliteration: Wa Nunazzilu Minal-Qur’aani Maa Huwa Shifaa’un Wa Rahmatun Lil-Mu’mineen
Hindi Meaning: “और हम क़ुरआन से वह चीज़ नाज़िल करते हैं जो मोमिनों के लिए शिफा और रहमत है।”
Reference: सूरह अल-इसरा (17:82)
दुआ नंबर 4 – सूरह अल-अंबिया से हज़रत अय्यूब ؑ की दुआ
Arabic:
أَنِّي مَسَّنِيَ الضُّرُّ وَأَنتَ أَرْحَمُ الرَّاحِمِينَ
Transliteration: Anni Massaniyad-Durru Wa Anta Arhamur-Raahimeen
Hindi Meaning: “बेशक मुझे तकलीफ पहुँची है, और तू सबसे बड़ा रहम करने वाला है।”
Reference: सूरह अल-अंबिया (21:83)
यह हज़रत अय्यूब ؑ की दुआ है जो उन्होंने सालों की बीमारी में पढ़ी। अल्लाह ने उनकी यह दुआ क़बूल की और शिफा अता फरमाई।
दुआ नंबर 5 – रूक़्या की दुआ (Shifa Ki Dua with Hands)
Arabic:
بِسْمِ اللَّهِ أَرْقِيكَ، مِنْ كُلِّ شَيْءٍ يُؤْذِيكَ، مِنْ شَرِّ كُلِّ نَفْسٍ أَوْ عَيْنِ حَاسِدٍ، اللَّهُ يَشْفِيكَ، بِسْمِ اللَّهِ أَرْقِيكَ
Transliteration: Bismillahi Arqeeka, Min Kulli Shay’in Yu’dheeka, Min Sharri Kulli Nafsin Aw ‘Ayni Haasidin, Allahu Yashfeeka, Bismillahi Arqeeka
Hindi Meaning: “अल्लाह के नाम से मैं तुझ पर दम करता हूँ, हर उस चीज़ से जो तुझे तकलीफ दे, हर नफ्स के शर से और हसद करने वाली नज़र से। अल्लाह तुझे शिफा दे। अल्लाह के नाम से मैं तुझ पर दम करता हूँ।”
Reference: सहीह मुस्लिम, हदीस: 2186
Shifa Ki Dua – कब पढ़ें? (When to Read)
| स्थिति | दुआ |
|---|---|
| खुद बीमार हों | दुआ नंबर 1 या 4 |
| किसी बीमार के पास जाएं | दुआ नंबर 2 — 7 बार पढ़ें |
| बच्चे पर दम करना हो | दुआ नंबर 5 |
| क़ुरआन से शिफा माँगनी हो | दुआ नंबर 3 तिलावत करें |
- सुबह और शाम को पढ़ना अफ़ज़ल है।
- रात को सोने से पहले बीमार शख्स पर दम करके यह दुआएँ पढ़ें।
- नमाज़ के बाद भी इन दुआओं का खास असर होता है।
- ज़मज़म पर पढ़कर पिलाना भी सुन्नत से साबित है।
Benefits of Bimari Se Shifa Ki Dua
1. अल्लाह पर तवक्कुल मज़बूत होता है जब इंसान दुआ माँगता है, तो वो यह यकीन करता है कि शिफा सिर्फ अल्लाह के हाथ में है। यह ईमान को मज़बूत करता है।
2. गुनाहों की मग्फ़िरत का ज़रिया नबी ﷺ ने फरमाया: “मुसलमान को जो भी तकलीफ पहुँचती है यहाँ तक कि एक काँटा भी चुभे अल्लाह उससे उसके गुनाह माफ़ फरमाता है।” (सहीह बुखारी: 5641)
3. रूहानी सुकून मिलता है बीमारी में घबराहट और बेचैनी होती है। यह दुआएँ दिल को सुकून और इत्मीनान देती हैं।
4. क़ुरआन बज़ात-ए-खुद शिफा है अल्लाह ने खुद फरमाया कि क़ुरआन मोमिनों के लिए shifa ki dua in Quran का सबसे बड़ा ज़रिया है। सूरह फातिहा को “उम्मुल क़ुरआन” के साथ-साथ “शाफ़िया” भी कहा गया है।
5. नज़र और जादू से हिफाज़त दुआ नंबर 5 (रूक़्या) बुरी नज़र और जादू के असर को दूर करने में मुफ़ीद है यह अहादीस से साबित है।
Bimari Se Shifa Ki Dua in Quran – खास आयात
क़ुरआन-ए-पाक में कई जगह अल्लाह ने शिफा का ज़िक्र किया है:
- सूरह यूनुस (10:57): “ऐ लोगो! तुम्हारे रब की तरफ से नसीहत आ चुकी है, और जो सीनों में बीमारी है उसकी शिफा।”
- सूरह अन-नहल (16:69): शहद को शिफा बताया गया है जो इस्लाम में तिब्ब-ए-नबवी का हिस्सा है।
- सूरह अश-शुअरा (26:80): हज़रत इब्राहीम ؑ ने फरमाया”और जब मैं बीमार पड़ूँ, तो वही मुझे शिफा देता है।”
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Explanation – इन दुआओं की अहमियत
Bimari se shifa ki dua सिर्फ एक दुआ नहीं है यह इस्लाम के उस अक़ीदे की तर्जुमानी है कि “अल-शाफ़ी” (शिफा देने वाला) सिर्फ और सिर्फ अल्लाह है।
दवा खाना और डॉक्टर के पास जाना भी इस्लाम में जायज़ और ज़रूरी है लेकिन असली शिफा अल्लाह की तरफ से आती है। नबी ﷺ ने खुद फरमाया: “हर बीमारी की दवा है पस इलाज करो।” (सहीह मुस्लिम: 2204)
इसलिए दुआ और दवा दोनों को साथ रखना सुन्नत है।
Conclusion
Bimari se shifa ki dua हर मुसलमान के लिए एक बेशकीमती अमल है। जब जिस्म कमज़ोर हो, दवाएँ असर न करें, और दिल बेचैन हो तब अल्लाह के सामने हाथ उठाना और यह दुआएँ पढ़ना सबसे बड़ा सहारा है।
क़ुरआन और हदीस से साबित यह दुआएँ सदियों से मुसलमानों की ज़िंदगी का हिस्सा रही हैं। Shifa ki dua पढ़ते वक्त दिल में पूरा यकीन रखें कि “अल्लाहु यशफ़ीक” अल्लाह ज़रूर शिफा देगा।
अल्लाह तआला हम सबको, हमारे घरवालों को, और तमाम मुसलमानों को हर बीमारी से शिफा अता फरमाए।
آمين يا رب العالمين
? FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1: Bimari se shifa ki dua कितनी बार पढ़नी चाहिए?
दुआ नंबर 2 बीमार के पास जाकर 7 बार पढ़ने की हदीस में तसरीह है। बाकी दुआएँ जितनी ज़्यादा पढ़ी जाएँ, उतना बेहतर है।
Q2: क्या shifa ki dua खुद बीमार पढ़ सकता है?
हाँ, बिल्कुल। दुआ नंबर 1 और 4 खास तौर पर खुद बीमार के लिए हैं।
Q3: Bimari se shifa ki dua in Quran कौन-सी है?
सूरह अल-इसरा (17:82), सूरह यूनुस (10:57) और सूरह अश-शुअरा (26:80) में शिफा का खास ज़िक्र है। सूरह फातिहा को भी “शिफा” कहा गया है।
Q4: क्या बच्चे पर दम करना जायज़ है?
हाँ। नबी ﷺ ने खुद अपने नवासों पर दम किया। दुआ नंबर 5 इसी के लिए है।
Q5: क्या दुआ के साथ दवा भी ज़रूरी है?
हाँ। इस्लाम में दवा करना और डॉक्टर से मिलना भी सुन्नत के दायरे में आता है। दुआ और दवा दोनों साथ-साथ होनी चाहिए।
Q6: क्या ज़मज़म पर दुआ पढ़कर पीना सही है?
हाँ, ज़मज़म पर shifa ki dua पढ़कर पिलाना सुन्नत से साबित है। नबी ﷺ ने फरमाया: “ज़मज़म उसी मक़सद के लिए है जिस लिए पिया जाए।” (इब्न माजा: 3062)